शनिवार, 28 फ़रवरी 2015

कश्मीर में भा ज पा सरकार डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को सच्ची श्रद्धान्जली ------------

कश्मीर में भा ज पा  सरकार डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को सच्ची श्रद्धान्जली ------------     1953 में जनसंघ का पहला राष्ट्रीय अधिवेशन कानपुर में हुआ. इसी अधिवेशन में डा.श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश को जम्मू-कश्मीर के बारे में यह तेजस्वी नारा दिया- " एक देश में दो विधान , दो प्रधान , दो निशान- नहीं चलेंगे नहीं चलेंगे ". यह डा.श्यामा प्रसाद मुकर्जी का ही निर्णय था कि वे पूरे भारत में घूम घूम कर जनसाधारण को वे इस नारे कि गंभीरता से परिचित करवाएंगे. और उनका यह निर्णय सही साबित भी हुआ. पूरे देश से उन्हें अभूतपूर्व समर्थन प्राप्त हो रहा था. इसी समर्थन से राज्य सरकार एवं उस समय कि केंद्र सरकार बिलकुल घबरा गयी थी.
इसी लिए बड़ी कुटिलता से पंजाब सरकार नें उन्हें पंजाब के माधोपुर में रावी नदी के पुल पर जाने दिया गया. ज्ञात रहे यही से पंजाब से जम्मू कश्मीर में दाखिल हुआ जाता था और जिस व्यक्ति के पास जम्मू कश्मीर में दाखिल होने का परमिट न हो उसे वाही रोक दिया जाता था . लेकिन कुटिलता वश उन्हें वहा नहीं रोक गया. उन्हें पुल पर जाने दिया गया. लेकिन पुल के बीचो बीच जम्मू कश्मीर पुलिस के एक दस्ते ने उन्हें रोक लिया और बंदी बना लिया. तत्पश्चात जैसा कि सर्वविदित है कि डा.श्यामा प्रसाद मुकर्जी की कश्मीर की एक जेल में रहस्यमयी परिस्तिथियों में म्रत्यु हो गयी . स्पष्ट है कि केन्द्रीय सरकर और जम्मू कश्मीर सरकार की यह संयुक्त योजना थी कि श्री मुकर्जी को जम्मू कश्मीर सरकार का बंदी बनाया जाए , पंजाब सरकार का नहीं. ऐसा क्यों किया गया ? क्या दोनों सरकारे प्रजा परिषद् के आन्दोलन एवं डा.श्यामा प्रसाद मुकर्जी को मिल रहे व्यापक जनसमर्थन से डरी हुई थी ? क्या इसमें कोई साजिश थी , जिसका उद्देश्य श्री मुकर्जी कि हत्या करना था ? आज तक इन प्रश्नों का कोई उत्तर नहीं मिल सका. किन्तु जवाहर लाल नेहरु और शेख अब्दुल्लाह की वजह से भारत ने एक महान सपूत खो दिया। 
डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी की शहादत व्यर्थ नहीं गयी. जन-जन में आक्रोश पैदा हुआ. प् जवाहर लाल नेहरु और जम्मू कश्मीर सरकार पर दबाव बना. परिणामस्वरूप कुछ ऐसे परिवर्तन हुए जो भारतवर्ष के लिए सुखद रहे. जम्मू कश्मीर से परमिट सिस्टम बंद कर दिया गया. राज्य में तिरंगा लहराया जाने लगा. उच्चतम न्यययालय , चुनाव आयोग और महालेखागार के अधिकार क्षेत्र विस्तार जम्मू कश्मीर तक कर दिया गया. और ऐसे अनेक परिवर्तन हुए जो राष्ट्र की एकता और अखंडता को सुदृढ़ करने में सहायक बने. जून महीने के 23 तारीख को डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी का बलिदान दिवस मनाया जाता है. उन्ही की याद में पंजाब सरकार ने रावी तट पर डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी की भव्य प्रतिमा प्रतिस्थापित की है. यह प्रतिमा डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी की शहादत के साथ आजाद भारत के प्रथम राष्ट्रीय आन्दोलन " प्रजा परिषद् आन्दोलन " की भी याद दिलाती है.

 आज के दिन जम्मू कश्मीर में भा ज पा  की सरकार बनने जा रही है -जो स्वप्न डॉ साहब ने देखा था आज उस दिशा में एक कदम आगे बढ़ा है आज भले ही वो हमारे बीच न हो किन्तु उनका बलिदान ब्यर्थ नहीं गया  ,आज  ऐसे महान पुरुष को सच्ची श्रद्धान्जली अर्पित करना हमारा नैतिक दायित्व है .

शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2015

विश्व में भारतीय डंका


भारत भूमि का विदेशियों द्वारा विवरण
जानिये भारत भूमि के बारे मे विदेशियों की राय, जिन्होंने भारत का गहनता से अध्यन किया और फिर कुछ चंद पंक्तियों में कितनी खूबसूरती से अपनी बात कही !
1. अलबर्ट आइन्स्टीन – हम भारत के बहुत ऋणी हैं, जिसने हमें गिनती सिखाई, जिसके बिना कोई भी सार्थक वैज्ञानिक खोज संभव नहीं हो पाती।
ार होने का इस धरती पर कोई स्थान है, तो वो है भारत।
3. हू शिह (अमेरिका में चीन राजदूत)- सीमा पर एक भी सैनिक न भेजते हुए भारत ने बीस सदियों तक सांस्कृतिक धरातल पर चीन को जीता और उसे प्रभावित भी किया।
4. मैक्स मुल्लर- यदि मुझसे कोई पूछे की किस आकाश के तले मानव मन अपने अनमोल उपहारों समेत पूर्णतया विकसित हुआ है, जहां जीवन की जटिल समस्याओं का गहन विश्लेषण हुआ और समाधान भी प्रस्तुत किया गया, जो उसके भी प्रसंशा का पात्र हुआ जिन्होंने प्लेटो और कांट का अध्ययन किया, तो मैं भारत का नाम लूँगा।
5. मार्क ट्वेन- मनुष्य के इतिहास में जो भी मूल्यवान और सृजनशील सामग्री है, उसका भंडार अकेले भारत में है।
6. आर्थर शोपेन्हावर- विश्व भर में ऐसा कोई अध्ययन नहीं है जो उपनिषदों जितना उपकारी और उद्दत हो। यही मेरे जीवन को शांति देता रहा है, और वही मृत्यु में भी शांति देगा।
7. हेनरी डेविड थोरो – प्रातः काल मैं अपनी बुद्धिमत्ता को अपूर्व और ब्रह्माण्डव्यापी गीता के तत्वज्ञान से स्नान करता हूँ, जिसकी तुलना में हमारा आधुनिक विश्व और उसका साहित्य अत्यंत क्षुद्र और तुच्छ जान पड़ता है।
8. राल्फ वाल्डो इमर्सन – मैं भगवत गीता का अत्यंत ऋणी हूँ। यह पहला ग्रन्थ है जिसे पढ़कर मुझे लगा की किसी विराट शक्ति से हमारा संवाद हो रहा है।
9. विल्हेल्म वॉन हम्बोल्ट  – गीता एक अत्यंत सुन्दर और संभवतः एकमात्र सच्चा दार्शनिक ग्रन्थ है जो किसी अन्य भाषा में नहीं। वह एक ऐसी गहन और उन्नत वस्तु है जिस पर सारी दुनिया गर्व कर सकती है।
10. एनी बेसेंट -विश्व के विभिन्न धर्मों का लगभग ४० वर्ष अध्ययन करने के बाद मैं इस नतीजे पर पहुंची हूँ की हिंदुत्व जैसा परिपूर्ण, वैज्ञानिक, दार्शनिक और अध्यात्मिक धर्म और कोई नहीं। इसमें कोई भूल न करे की बिना हिंदुत्व के भारत का कोई भविष्य नहीं है। हिंदुत्व ऐसी भूमि है जिसमे भारत की जड़े गहरे तक पहुंची है, उन्हें यदि उखाड़ा गया तो यह महावृक्ष निश्चय ही अपनी भूमि से उखड जायेगा। हिन्दू ही यदि हिंदुत्व की रक्षा नही करेंगे, तो कौन करेगा? अगर भारत के सपूत हिंदुत्व में विश्वास नहीं करेंगे तो कौन उनकी रक्षा करेगा? भारत ही भारत की रक्षा करेगा। भारत और हिंदुत्व एक ही है।